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क्या महंगाई दर के स्तर को घटाकर मोदी सरकार ने अच्छे दिन लाए हैं, जानें यहा

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मुंबई : भाजपा सरकार के तीन साल पूरे होने के पहले एक मुद्दा फिर से उभर रहा है | मंहगाई का सवाल वही है, क्या सच में भाजपा सरकार के आने से महंगाई के स्तर में गिरावट आई है ? क्या सच में अच्छे दिन आए हैं ?

 

2014 में हिमाचल प्रदेश की रैली में पीएम मोदी ने महंगाई के मुद्दे पर जंग छेड़कर आम जनता के दिलों में घर कर लिया था | फिर कांग्रेस से ऊब चुकी जनता ने मोदी सरकार पर भरोसा जताया | सत्ता में आने के पहले ही मोदी सरकार ने अच्छे दिन लाने का वादा आम जनता से किया था | पर क्या सच में गरीब जनता के अच्छे दिन आए ? क्या मोदी राज में मंहगाई दर घट गई है ? क्या सच में रोजमर्रा के खाने पीने के सामानों में गिरावट आई है ?




आंकड़ो की माने तो मंहगाई दर के स्तर में 2014 के मुकाबले 2017 में काफी गिरावट आई है पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है | भाजपा सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री  रामविलास पासवान मानते हैं कि महंगाई दर में कमी हुई है पर यदि 2014 के दामों पर अब के मुकाबले नजर डालें तो सबकुछ उसके विपरीत ही है |

 

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आंकड़ो के हिसाब से बताना चाहते हैं कि मई 2014 में देश के कई शहरों में एक किलो आटा 17 से 44 रूपये प्रतिकिलो के बीच मिलता था जो की मई 2017 में 20 से 50 रूपये प्रतिकिलो के बीच मिलता है | अरहर की दाल पहले 60 से 86 रूपये प्रतिकिलो के हिसाब से मिलती थी जिसकी कीमत अब 65 से 145 प्रतिकिलो हो गई है | बता दें कि बीच में इन दालों की कीमत 200 रूपये प्रतिकिलो पहुँच गई थी | उसी तरह चावल पहले 20 से 40 रूपये प्रतिकिलो मिलता था पर अब 20 से 47 रूपये में मिल रहा है |




चीनी के दाम भी 2014 में 31 से 50 रूपये प्रतिकिलो के बीच में थे जो अब 35 से 56 रूपये किलो मिल रहा है | उसी तरह दूध के दामों में भी 5 से 6 रूपये प्रति लीटर की महंगाई देखी गई है | इसका मतलब तो यह है कि खाने पीने वाली प्रमुख वस्तुओं के दाम कम होने की बजाय बढ़ गए हैं | अगर सरकारी आंकड़ो की माने तो मई 2014 में खुदरा मंहगाई दर 8.22 फीसदी थी जो अब अप्रैल 2017 में 2.66 फीसदी है | और खाने पीने की चीजों की खुदरा मंहगाई दर 8.89 फीसदी से घटकर 0.61 है पर फिर भी दामों में गिरावट नही हुई है |

 

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आम आदमी आज भी मंहगाई को लेकर काफी परेशान है | मोदी सरकार ने हमेशा आरोप लगाया कि कांग्रेस रियल टाइम डाटा नही प्रोवाइड करती जिससे मंहगाई दर की हकीकत का पता नही चल पाता | पर क्या स्वयं उनकी सरकार रियल टाइम डाटा कलेक्ट कर पाने में सक्षम हो पाई है ?  उसी तरह यदि ईंधन की बात की जाए तो एक लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 71.41 रूपये से घटकर 65.9 रूपये के करीब हो गए हैं | तो डीजल के दाम 56.71 रूपये के बजाय 57.35 रुपये हो गए हैं | उसी तरह रसोई गैस के सिलेंडरों की बात करे तो दिल्ली में साल 2014 में सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 414 रुपये थी जो अब 442.77 रुपये में मिल रही है | जबकि विपक्ष की माने तो उनके मुताबिक दुनिया के बाजारों में कच्चे तेल के दामों में जो गिरावट हुई है सरकार उस तरह की कोई कमी ईंधन के दामों में नही  कर पाई है |




अगर सब्जियों की बात करे तो प्याज और आलू के दामों में कुछ गिरावट हुई है बाकी दाम तो थोड़े ऊपर नीचे हुए हैं | कुल मिलाकर मंहगाई पर सरकार का मिलाजुला प्रदर्शन है | कुछ चीजों के दाम घटे हैं तो कुछ के काफी बढ़े हैं | जीएसटी लाकर सरकार ने मंहगाई पर नकेल कसने की कोशिश की है पर यह तो आनेवाले दिनों में पता चलेगा कि इसका कितना और क्या असर हुआ है |




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