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मुसलमान होते हुए भी लाउडस्पीकर से अजान होने के खिलाफ लड़े और सात मस्जिदों से उतारे भोंपू

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लाउडस्पीकर
Muslim Man Against Azaan through Loudspeaker

मुंबई : जहाँ एक तरफ अज़ान लाउडस्पीकर से किए जाने पर पूरे देश में बॉलीवुड से लेकर आम व्यक्ति की कई तरीके की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं हैं | उसी बीच मुंबई में एक ऐसे व्यक्ति सामने आए हैं जो कि स्वयं एक नमाज़ी मुसलमान हैं |

 

मुसलमान होते हुए भी उन्होंने लाउडस्पीकर से अज़ान किए जाने पर एतराज़ किया है और पिछले कई सालों से वे इसका विरोध कर रहे हैं | आपको बता दें कि मुंबई में रहने वाले मोहम्मद अली उर्फ बाबु भाई मुसलमान होते हुए भी लाउडस्पीकर से अज़ान किए जाने को गैर इस्लामिक मानते हैं |

 

इस उम्र में अपनी बात मनवाने के लिए उन्होंने कोर्ट में पिटीशन दायर की और पैसों की कमी के कारण उन्होंने खुद ही अपने केस की पैरवी कर यह साबित किया कि कुरान को लाउडस्पीकर की अज़ान गवारां नहीं | इस विषय में जब एनडीटीवी ने याचिकाकर्ता मोहम्मद अली से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि ‘लाउडस्पीकर इस्तेमाल’ धर्म का हिस्सा नहीं है |

 

उनके मुताबिक धर्म तो 400 साल पुराना है और लाउडस्पीकर को आए केवल 100 साल ही हुए हैं | तो लाउडस्पीकर हटाने से धर्म को कोई खतरा नहीं हो सकता | धर्मस्थलों पर बजनेवाले लाउडस्पीकर को लेकर संतोष पाचलग, डॉ बेडेकर और मोहम्मद अली इन तीनों याचिकाकर्ताओं की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस और जस्टिस सैय्यद ने अगस्त 2016 के दिन फैसला सुनाते हुए कहा कि देश में कहीं भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच किया गया तो 1 लाख तक जुर्माना और पाँच साल तक के लिए जेल की सज़ा होगी |

 

कानूनी जीत हासिल करने के बाद बाबूभाई ने धर्मग्रंथो के अपने दावों को साबित करने के लिए 64 फतवे भी ढूंढ़ निकाले हैं | वे हमेशा कहते हैं कि उनकी लड़ाई धर्म के खिलाफ बिलकुल भी नहीं है | बाबूभाई ने कुरान का हवाला देकर मुंबई के बेहराम पाड़ा और भारत नगर जैसे मुस्लिम इलाकों की सात मस्जिदों से भोंपू उतरवा दिए |

 

उनकी इस लड़ाई को समझने में उनके समुदाय के लोगों को काफी वक्त लगा | एनडीटीवी इंडिया से वहीं के स्थानीय मदनी मस्जिद के ट्रस्टी ने बात करते वक्त बताया कि उनकी मस्जिद से तीन लाउडस्पीकर निकाले गए | पर उन स्पीकरों को धीरे धीरे हटाया गया | पहले नमाज़ में फिर अज़ान के वक़्त और उसके बाद जुम्मे के दिन इसे हटा दिया गया | ध्यान देने वाली बात यह है कि बाबूभाई भी चाहते तो सोशल मीडिया का सहारा ले सकते थे पर उन्होंने यह लड़ाई संवैधैनिक तरीके से लड़ी जिसकी वजह से कानूनी तौर पर आया फैसला पुरे देश में लागू हो चूका है |

 

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