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सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पीठ को सौंपा तीन तलाक का मामला, 11 मई से लगातार होगी सुनवाई

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तीन तलाक

मुंबई : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को  मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक, निकाह हलाला और बहू विवाह को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए 11 मई की तारीख तय कर दी है | सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ही इस पर संज्ञान दे दिया था पर गुरुवार को चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान  पीठ को सौंप दिया है और गर्मियों की छुट्टियों में सुनवाई करने को कह दिया |

 

हालांकि कोर्ट में मौजूद एटार्नी जनरल सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने गर्मियों की छुट्टी में सुनवाई पर एतराज जताया लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा “कोर्ट में आनेवाले कई मसले कई सालों तक चलते रहते हैं | मेरे हिसाब से इन्हें जल्द निपटाने का यही तरीका है | मैं और साथी जज छुट्टियों में काम करने को तैयार हैं | आप नहीं करना चाहते तो फिर हम भी छुट्टी मनाएंगे” इस पर वहां मौजूद पक्षों ने 11 मई को सुनवाई करने पर सहमति जताई है |

 

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27 मार्च को आल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक, बहु विवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिकाएँ विचारयोग्य नहीं हैं क्योंकि यह मुद्दे न्यायपालिका के अंतर्गत नहीं आते हैं | उनके मुताबिक यह प्रथाएं कुरान पर आधारित हैं | आपको बता दें कि कोर्ट में यह मामला शुरू होने के बाद अब तक सायरा बानो, आफरीन रहमान, फरहा फैज, नूरजहाँ नियाज़ और इशरत जहां नाम की महिलाएं  तीन तलाक को खत्म करने की याचिका दायर कर चुकी हैं जबकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा ए हिंद जैसे संगठनों ने भी एक अर्जी दायर कर अदालत में चल रही कार्यवाई बन्द करने की मांग की है |

 

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इन संगठनों के मुताबिक यह एक धार्मिक मामला है और कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए | इस मामले पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट स्टैंड लेते हुए कहा कि पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है, उसके कई प्रावधान महिलाओं के बराबरी और उनके सम्मान के साथ जीवन जीने का हनन करते हैं |जिससे इन्हें असंवैधैनिक करार करते हुए रदद् कर दिया जाना चाहिए |

 

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